Saturday, 13 September 2014

आइसिस के विरुद्ध ओबामा चारों खाने चित

एक दो दिवस पूर्व ओबामा ने आइसिस के विरुद्ध अपनी रणनीति का खुलासा किया था आज ऐसी खबर आई है की लग रहा है की ओबामा को आइसिस ने शय और मात दे दी है. 

ओबामा तथा हिलरी के प्रिय फ्री सिरियन आर्मी के कई घटक दलों ने आइसिस के साथ शांति समझौता कर लिया है . इन सब मे CIA द्वारा समर्थित और अमरीकी सरकार द्वारा पसंद किए जाने वाली सिरियन रेवोल्यूशनरी फ्रंट भी शामिल है. अल-नुसरा नामक एक भयानक और खूनी दल ने इस समझौते को रूप दिया है. इसके अनूसार सभी दलों ने एक दूसरे पेर आक्रमण ना करने का निर्णय लिया है . तथा सब मिलकर राष्ट्रपति असद के खिलाफ लड़ने का भी मन बना चुके है.

सीआईए समर्थित जो एसआरएफ कमांडर है उसने साफ रूप से कहा की वो किसी भी समूह के साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार है जो  नुस्सायरी शासन के विरुद्ध युध के लिए उत्सुक हो . यह अमेरिकी सरकार और सीआईए के साथ घनिष्ठ संबंध वाला इंसान हैं .

दूसरी ओर श्री ओबामा ने निर्णय लिया है की वह वास्तविक षड्यंत्रकारी सऊदी अरब की मदद से इन्ही लोगों को प्रशिक्षित करेगा. उधर जर्मनी आईएसआईएस के इन सहयोगी दलों को हथियार भेज रहा है.

खबर यह भी है की सऊदी  अरब पाकिस्तान से मिलकर एक नया आतंकी संघटन का निर्माण कर रहा है जो शियाओं का मूल विनाश करेगी. 

अब असद के लिए मुसीबतें बढ़ रही हैं. संभवतया राष्ट्रपति की फ़ौजो को कई दिशाओं से बहुआयामी हमलों का सामना करना होगा. मुझे नही लगता की वह ऐसे ख़तरे का सामना कर पाएँगे. अगर राष्ट्रपति की सत्ता गिर गयी तो मान लीजिए शीया लोगों का भयानक नरसंहार होना निश्चित है.

ओबामा और उनकी सरकार अमेरिकी मतदाताओं द्वारा की गई सबसे बड़ी गलती साबित हो रही है .